गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

महाशिवरात्रि परिवर्तन की रात्रि - HAPPY MAHASHIVRATRI 2021

        हिन्दू धर्म में अनेक त्यौहार, उत्सव मनाये जाते हैं। हर त्यौहार को मनाने के पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण होता हैं और ये सनातन संस्कृति की महिमा हैं। महाशिवरात्रि उन महान पर्वों में से एक हैं। महाशिवरात्रि की रात्रि हिन्दू धर्म को मानने वाले के लिए एक महाउत्सव के रूप में इसका आनंद उठाते हैं और उनके लिए महाशिवरात्रि का बहुत महत्व हैं। 


Prernamurti Bharti shriji
प्रेरणामूर्ति श्रीजी



महाशिवरात्रि का महत्व : महाशिवरात्रि को महत्व स्वरूप गृहस्थी लोग शिव पार्वती के विवाह से जोड़ते हैं की इस दिन शिवजी का माँ पार्वती से विवाह हुआ था। किसान वर्ग के लोग इसे ऋतुपरिवर्तन से जोड़ते हैं। योगी जन इस दिन अपनी योग साधना को ऊँचाई की ओर ले जाने हेतु साधना करते हैं। महाशिवरात्रि की रात्रि जागरण की रात्रि होती हैं। इस दिन अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत करने का दिन हैं। अपनी ऊर्जा को शिखर तक ले जाने की रात्रि हैं महाशिवरात्रि। साधक के लिए उसकी साधना में उत्तरोतर प्रगति की उड़ान भरने का दिन है महाशिवरात्रि। शिव अर्थात जो सदैव से है सृष्टि के निर्माण से पहले भी सृष्टि के विसर्जन के बाद भी। शिव को मात्र देवता नहीं अपितु आदि-गुरु भी कहा गया हैं। बं बीज मंत्र के जप का विशेष महत्व हैं। 



शिवजी की पूजा उपासना व्रत जागरण आदि का इस दिन विधान है। इस दिन जागरण का अत्यधिक महत्व हैं।

महाशिवरात्रि जागृतरात्रि/महाशिवरात्रि महारात्रि क्यूँ है? 

    महाशिवरात्रि की रात को सभी साधक 4 प्रहर की पूजा के साथ जागरण अपने आध्यात्मिक उन्नति के लिए करते हैं। जीव को शिवत्व की ओर ले जाने वाला दिन है महाशिवरात्रि। शिव को संहार करने वाला बताया गया हैं। संहार सेसम् + हृ+घञ् =संहार, संस्कृत से आया हुआ शब्द है अर्थात एकत्र करना होता है। एकत्र करना अर्थ से मैथिली भाषा में सम्हारना एवं हिन्दी में सम्हालना शब्द बना है। संहार शब्द का मतलब हम ले सकते है, जो हमें संवारे !! हमारा पुनःनिर्माण करें !! और पुनःनिर्माण करने के लिए विसर्जन करना जरूरी होता हैं। विसर्जन स्व का अर्थात स्वयं को शिव में समर्पित करने का । महाशिवरात्रि की रात में ग्रह नक्षत्रों के ऐसे योग बनते हैं जिनसे साधक अपने शरीर की ऊर्जा को ऊपर की ओर ले जा सकता हैं। इस दिन इन्हीं भावनाओं के साथ जागरण करके शक्ति अर्जित की जाती हैं। इस दिन जागरण में अत्यंत शक्तिवर्धक ऊर्जावान महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय,रुद्राष्टकम जप किया जाता हैं। 



महाशिवरात्रि कब है?

 महाशिवरात्रि अर्थात शिव की रात्रि। हर कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती हैं और फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती हैं। ये लगभग फरवरी-मार्च महीने में आती हैं। इस बार महाशिवरात्रि 11 मार्च 2021 को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि की पूजा का विशेष महत्व हैं। इस दिन 4 प्रहर की पूजा की जाती हैं।


महाशिवरात्रि को शिवलिंग की पूजा क्यों करते हैं? 

महाशिवरात्रि को किस वस्तु को शिवलिंग पर अर्पित करने से क्या लाभ प्राप्त होता हैं? आइये प्रेरणामूर्ति श्रीजी की श्रीवाणी में जाने-
 

 सत्प्रेरणा के द्वारा त्योहारों को आध्यात्मिकता के साथ साथ वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर उत्साह के साथ मनाया जाता हैंमहाशिवरात्रि महापर्व की अधिक जानकारी के लिए- http://satprerna.org/shiv-ratri/

महाशिवरात्रि परिवर्तन की रात्रि - HAPPY MAHASHIVRATRI 2021

          हिन्दू धर्म में अनेक त्यौहार, उत्सव मनाये जाते हैं। हर त्यौहार को मनाने के पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण होता हैं और ये सनातन ...